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खेती के साथ मशरूम का साथबिछिया के किसानों की बढ़ती आय और नई पहचान

खेती के साथ मशरूम का साथ
बिछिया के किसानों की बढ़ती आय और नई पहचान
मंडला

कहते हैं, छोटी शुरुआत भी बड़ी कामयाबी की राह खोल देती है बिछिया क्षेत्र के किसानों ने इसे सच कर दिखाया है।पारंपरिक खेती पर निर्भर किसानों की आय सीमित थी, लेकिन अब मशरूम उत्पादन ने उनकी जिंदगी में नई रोशनी भर दी है। प्रशासन की पहल, प्रशिक्षण और किसानों की मेहनत ने इस छोटे से प्रयोग को आर्थिक सशक्तिकरण के मॉडल में बदल दिया।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्रीमती सोनाली देव और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री मुकेश कुलस्ते के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 70 किसानों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। आजीविका परियोजना के सहयोग से नरेनी माल, कन्हारी कला, गदिया चंगरिया के लगभग 50 किसान सफलतापूर्वक मशरूम उत्पादन कर रहे हैं।

इस मुहिम में श्री मनोज धूमकेती और श्रीमती बैसखिया बाई मास्टर ट्रेनर बनकर अन्य किसानों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। उनका प्रयास अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम नरेनी माल के किसान मनोज धूमकेती ने साबित कर दिया कि कम संसाधनों में भी बड़ी कमाई संभव है।
किसान श्री मनोज धूमकेती ने मात्र 10×10 फीट के छोटे कमरे में मशरूम उत्पादन शुरू कर अच्छी कमाई कर ली है। उन्होंने बताया कि 50 मशरूम बेड तैयार करने में केवल 2 हजार रुपये का खर्च आया। उत्पादन के एक चक्र में ही उन्हें लगभग 8 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।
मनोज धूमकेती के अनुसार, मशरूम उत्पादन कम समय, कम जगह और कम निवेश में किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी साधन साबित हो सकता है। इससे पारंपरिक खेती के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी खुल रहे हैं।
मनोज कहते हैं अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ मशरूम उत्पादन जोड़ लें, तो यह आय का आसान और बेहतरीन अतिरिक्त साधन बन सकता है।

प्रशासन का उत्साहवर्धन

30 जनवरी को कलेक्ट्रेट में मनोज धूमकेती ने अपने उत्पादित मशरूम बेड अधिकारियों को भेंट किए। कलेक्टर ने इस प्रयास की सराहना करते हुए जिले के अन्य किसानों को भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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