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एलआईसी बुढार शाखा पर गंभीर आरोप: मेडिकल रिपोर्ट से लेकर डेथ क्लेम तक गड़बड़ियों की आशंका

50 वर्ष से अधिक उम्र के बीमाधारकों की फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का आरोप
डेथ क्लेम और रिफंड में करोड़ों के गोलमाल की चर्चा

12 शाखाओं में अनियमितताओं की जांच की मांग तेज

शहडोल शिवम कुशवाहा

सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बुढार शाखा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर सामने आए मामलों के अनुसार शाखा में बीमा प्रस्तावों, डेथ क्लेम और रिफंड प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी बुढार शाखा में बीमा भुगतान में गड़बड़ी सामने आने पर एक कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके बावजूद अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब एक ही शाखा में इतने मामले सामने आए हैं तो शहडोल डिवीजन की अन्य 11 शाखाओं में स्थिति क्या होगी।
मेडिकल रिपोर्ट में हेरफेर के आरोप
बताया जा रहा है कि अधिक से अधिक बीमा पॉलिसी बेचने के दबाव में 50 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहकों के लिए आवश्यक मेडिकल जांच प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। आरोप है कि स्थानीय डॉक्टरों से कोरे (ब्लैंक) मेडिकल फॉर्म पर हस्ताक्षर कराकर बाद में उन्हें आवश्यकता अनुसार भरकर प्रस्ताव पूरे किए जा रहे हैं।

छद्म अभिकर्ताओं का खेल

जानकारी के मुताबिक, कई प्रभावशाली पदों पर बैठे अधिकारी, नेता और विभाग प्रमुख अपने रिश्तेदारों या पत्नियों के नाम पर एलआईसी एजेंसी लेकर व्यवसाय बढ़ा रहे हैं। ऐसे छद्म अभिकर्ता शाखा में सक्रिय रहते हैं और नियमों को दरकिनार कर काम करते हैं।

नियमों की अनदेखी, पॉलिसी रिवाइवल में गड़बड़ी

एलआईसी के नियमों के अनुसार पॉलिसी सरेंडर करने के बाद एक निश्चित अवधि तक नया बीमा नहीं दिया जा सकता, लेकिन आरोप है कि इस नियम की अनदेखी कर पुराने बीमा को गलत जानकारी के आधार पर नई पॉलिसी में रिवाइव या “रीसायकल” किया जा रहा है। ग्राहकों को अधूरी या भ्रामक जानकारी देकर सहमति ली जा रही है।
डेथ क्लेम और रिफंड में घोटाले की चर्चा
बुढार शाखा में एक बहुचर्चित डेथ क्लेम मामले में करोड़ों रुपए के गोलमाल की बात सामने आई थी। आरोप है कि जांच केवल औपचारिक रही और संबंधित दस्तावेज तक नष्ट कर दिए गए। इसी तरह बीओसी (रिफंड) मामले में भी कई पॉलिसीधारकों के भुगतान में गड़बड़ी की बात सामने आई, लेकिन कार्रवाई सीमित स्तर पर ही रही।

जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के आर्थिक अपराध सरकारी कंपनी की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मांग की जा रही है कि पूरे शहडोल डिवीजन की सभी 12 शाखाओं की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और उठाए गए कठोर कदमों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

निष्कर्ष:
एलआईसी जैसी भरोसेमंद संस्था पर लगे ये आरोप गंभीर हैं। यदि समय रहते पारदर्शी जांच नहीं हुई तो न केवल ग्राहकों का भरोसा डगमगाएगा, बल्कि सरकारी संस्थाओं की साख पर भी असर पड़ेगा।

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