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सनातन संस्कृति विश्व कल्याण का आधार-


संत स्वामी परमात्मानंद जी महाराज के विचार
शहडोल दिनेश चौधरी

ओरिएंट पेपर मिल्स अमलाई। स्थानीय सकल हिंदू समाज बकहो मंडल द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में छत्तीसगढ़ संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष ,पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त ,युग पुरुष आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज के परम शिष्य एवं साध्वी ऋतंभरा जी के गुरु भाई संत श्री परमात्मानंद जी महाराज की अमृतवाणी से पूरा वातावरण आध्यात्ममय हो गया। 
भारत रत्न नानाजी देशमुख के नेतृत्व में ग्राम विकास के क्षेत्र में अग्रणी कार्यकर्ता समाज सेविका ,सहजजीवन समिति शहडोल की संचालिका ,समाजसेवी ,परम विदुषी श्रीमती मनीषा माथनकर जी की कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण पर प्रेरक व संस्कृतिनिष्ठ प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शहडोल विभाग के विभाग संपर्क प्रमुख श्री मनोज जी गौतम ने पंच परिवर्तन पर अपने प्रेरक विचारों से उपस्थित जन समूह को ऊर्जान्वित्त कर दिया।
भव्य एवं दिव्य कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों को मंगल वाद्य ,मंगल कलश ,पुष्प वर्षा के साथ अभिनंदन करते हुए मंच पर लाया गया ,जहां उन्हीं के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एवं हम सब की माता भारत माता के चित्रों पर पुष्पहार, तिलक वंदन, पूजा अर्चन पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ विराट हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।

 अतिथियों का आत्मीय एवं काव्यात्मक परिचय मंच संचालक मृगेंद्र श्रीवास्तव प्राचार्य सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओरिएंट पेपर मिल्स अमलाई के द्वारा कराया गया ।
वहीं श्रीफल ,अंग वस्त्र, माल्यार्पण एवं तिलक वंदन के साथ संत जी का अभिनंदन श्री सत्येंद्र सोनी जी ,मनीषा दीदी का अभिनंदन श्रीमती मधु गुप्ता एवं मनोज गौतम जी का अभिनंदन श्री गजेंद्र मिश्रा जी के द्वारा बड़े आत्मीय एवं श्रद्धा भाव से किया गया। 
परिचय एवं स्वागत पश्चात अतिथियों की अनुमति प्राप्त कर भगवान श्री राम एवं सकल हिंदू समाज के सम्मान में भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति पर आधारित सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई ।
जिनमें सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओरिएंट पेपर मिल के चार कार्यक्रम, भमरहा लोकनृत्य समिति के दो कार्यक्रम एवं लीना महानंद जी द्वारा निर्देशित एक कार्यक्रम मंच से प्रस्तुत किया गया ।
जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव विभोर एवं आनंदित कर दिया 

यह प्रस्तुतियां संस्कृति एवं प्रकृति के संरक्षण ,संवर्धन पर आधारित तो थी हीं साथ ही इनमें सामाजिक जागरण का भी संदेश स्पष्ट दिखाई दिया। मोबाइल के दुष्परिणाम को नाटक के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिर के कलाकारों ने अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सराहना प्राप्त की ।
वही लोक कलाकारों को भी खूब प्रशंसा मिली ।
ज्ञात हो इन लोक कलाकारों को पूर्व में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी के द्वारा उनकी सुंदर प्रस्तुति के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है ।

उद्बोधन के क्रम में श्रीमती मनीषा माथनकर जी ने पर्यावरण संचेतना जगाते हुए रील लाइफ से निकलकर रियल लाइफ में आने का आग्रह किया ।
आपने मातृ शक्तियों को जगाते हुए उनकी समाज में महती भूमिका को भी व्यक्त किया 

कर्म को धर्म के निर्देशन से करने पर श्रेष्ठ परिणाम की प्राप्ति होती है ।

आपने कहा हमारे धर्म ग्रंथ हमें उत्तम और श्रेष्ठ जीवन जीने का संदेश देते हैं ।
इतना ही नहीं आत्म कल्याण के साथ परोपकार की भी शिक्षा हमें इन्हीं से प्राप्त होती है ।
हमें चाहिए कि हम अपनी प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करें ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संपर्क प्रमुख श्री मनोज गौतम जी ने स्व का बोध ,कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता ,नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण जैसे पंच परिवर्तन के प्रमुख विषयों पर उपस्थित जन समूह का मार्गदर्शन किया ।
आपने शक्ति संचय और शक्ति के सदुपयोग पर बल देते हुए वर्तमान चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया ।
सामाजिक समरसता की वर्तमान अपरिहार्यता पर भी आपने प्रेरक विचार व्यक्त किया ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संत स्वामी परमात्मानंद जी महाराज ने अपनी सधुक्कड़ी शैली में देश के सनातन और अधुनातन पर अपने विचार व्यक्त किये। 
आपने विभिन्न पौराणिक एवं ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए भारत के संघर्ष और उत्कर्ष का भी उपस्थित जन समूह को बोध कराया ।
आपकी वाणी में राष्ट्रहित एवं सामाजिक उत्थान का स्वर स्पष्ट मुखर हो रहा था ।
आपकी ओजस्वी एवं तेजस्वी वक्तृत्व शैली ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया ।
बंदा बैरागी एवं ऐसे ही कितने ज्ञात अज्ञात राष्ट्रभक्तों पर विधर्मियों द्वारा किए गए अत्याचारों का जिक्र करते हुए संत जी का कंठ अवरुद्ध सा हो गया ।
उनके चेहरे पर क्रोध के साथ देश प्रेम स्पष्ट झलक रहा था। आपने हजारों की संख्या में उपस्थित जन समूह को जागृत करते हुए उनके कर्तव्य बोध का परिचय कराया ।
विभिन्न भजनों एवं देशभक्ति गीतों के माध्यम से जहां आपने अपने भावों की अभिव्यक्ति की वहीं राष्ट्रभक्ति एवं धर्म निष्ठा का भी भाव जगाया ।
विद्या भारती की श्रेष्ठ रीति का जिक्र करते हुए आपने समाज से आग्रह भी किया कि अपने मातृभाषा का हम प्रचार प्रसार करें उसे सम्मान दें एवं हम अपने नन्हे मुन्ने शिशुओं को सरस्वती शिशु मंदिर जैसे उत्कृष्ट भारतीय ज्ञान परंपरा का संवहन करने वाले विद्यालयों में अध्ययन कराएं।
हमें हर पल, हर क्षण सजग रहकर अपने साथ अपनों के उत्थान और कल्याण की भी चिंता करनी होगी ।
यही होगी आज के विराट हिंदू सम्मेलन की सार्थकता ।
न केवल एक दिन बल्कि दिन के चौबीस घंटे हमारे मन में यह भाव बना रहे ।
ऐसी उन्होंने कामना की। संत जी की वाणी एवं विचार सुनकर उपस्थित जनसमूह मंत्र मुग्ध हो गया ।
दो से तीन घंटे तक पूरे पांडाल में सुई पटक सन्नाटा छाया हुआ था ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम के संयोजक श्री मृगेन्द्र सिंह जी के द्वारा अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति तथा आयोजन में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग प्रदान कर्ताओं के प्रति विनम्र कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए देशभक्ति एवं हिंदुत्वनिष्ट उद्घोष के साथ अपने भाव व्यक्त किए गए । श्री रविशंकर शुक्ल एवं उनके सहयोगी स्वयंसेवकों के द्वारा
भारत माता की आरती, तत्पश्चात भारतीय परंपरा अनुसार समरसता भोज के साथ विराट हिंदू सम्मेलन का कार्यक्रम पूर्णता को प्राप्त हुआ । विराट हिंदू सम्मेलन के सफल आयोजन में सकल हिंदू समाज के समस्त कार्यकर्ताओं का योगदान सराहनीय रहा।
सभी के चेहरे पर अत्यंत आनंद एवं उल्लास स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा था
आपस में चर्चाएं थीं कि ऐसा अद्भुत आयोजन पहली बार हुआ है और इतना सुंदर उद्बोधन सुनकर मन आनंदित है। 
मंच संचालक श्री मृगेंद्र श्रीवास्तव की आकर्षक संचालन शैली ने देर तक श्रोताओं को सम्मोहित किये रखा।
राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्षों की पूर्णता पर सुश्री स्नेहा चतुर्वेदी जी द्वारा वंदे मातरम की मनभावन प्रस्तुति भी मंच से दी गई।
समूचे आयोजन में जनप्रतिनिधियों के साथ, सकल हिंदू समाज के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित जन ,माताएं, बहनें एवं युवकों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

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