अवैध शराब और प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
उमरिया अरुण विश्वकर्मा
उमरिया जिले के चंदिया थाना क्षेत्र अंतर्गत कोइलारी ग्राम में महिलाओं द्वारा शराबबंदी को लेकर किया गया विरोध अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि इसी क्षेत्र से एक और बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आ गया है। कोइलारी ग्राम से कुछ ही दूरी पर स्थित बिलासपुर गांव में अवैध शराब के बचे जहरीले अवशेष को खाने से पाँच गायों की मौत हो गई। यह घटना न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकार की गौ-रक्षा नीति की भी हकीकत को उजागर करती है।
बताया जा रहा है कि बिलासपुर गांव के पास अवैध रूप से कच्ची शराब बनाई जा रही थी। शराब बनाने के बाद बचे जहरीले अवशेष को खुले में फेंक दिया गया, जिसे खाने से पाँच गायों की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, मृत गायें लंबे समय से उसी क्षेत्र में विचरण कर रही थीं। घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई देखने को नहीं मिली है और न ही कोई दोषियों की गिरफ्तारी हुई है।
एक ओर सरकार गाय को “गौ माता” का दर्जा देती है, गौशालाओं और गौ-रक्षा के नाम पर योजनाएं चलाती है, वहीं दूसरी ओर अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है। सवाल यह उठता है कि जब खुलेआम अवैध शराब बनाई जा रही है, तो आबकारी विभाग और पुलिस की भूमिका क्या है? क्या यह सब उनकी जानकारी के बिना हो रहा है, या फिर जानबूझकर आंखें बंद कर रखी हैं?
कोइलरी ग्राम की महिलाओं ने हाल ही में शराब के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि अवैध शराब गांव की सामाजिक व्यवस्था, परिवारों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है। अब बिलासपुर की यह घटना उस खतरे को और भी गंभीर रूप में सामने लाती है, जहाँ इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशु भी इसकी कीमत चुका रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो और मृत गायों के मामले में पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाए। साथ ही प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
यह घटना सिर्फ पाँच गायों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, अवैध कारोबार और सरकारी दावों की सच्चाई पर एक बड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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