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सरकारी योजनाओं पर भ्रष्टाचार का ग्रहण जनपद पंचायत बुढार का है मामला।

सचिव सरपंच सहित इंजीनियर के कर कमलों से हुआ भारी भ्रष्टाचार* 

शहडोल प्रमुख

जनपद बुढार अंतर्गत ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी बाउंड्री वॉल निर्माण में 6.98 लाख का महाघोटाला, सचिव और इंजीनियर की जुगलबंदी पर जनपद पंचायत बुढार क्षेत्र के ग्राम कुम्हेडिन और मुसरा में बच्चों के भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना—आंगनबाड़ी केंद्र की बाउंड्री वॉल निर्माण—आज बड़े भ्रष्टाचार का केंद्र बिंदु बन गई है। यह मामला महज वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के भीतर पनप रहे षड्यंत्र का प्रतीक है, जहाँ ग्राम पंचायत सचिव, रामदमन सिंह, और निर्माण कार्य के पर्यवेक्षक (सुपरवाइज़र), उप-अभियंता (सब-इंजीनियर) आशीष प्रजापति, की कथित मिलीभगत से 6,98,000 की राशि का गबन किए जाने का सनसनीखेज आरोप ग्रामीणों ने लगाया  है।  निर्माण कार्य अधूरा है, गुणवत्ताहीन है, लेकिन बिल भुगतान पूरा हो चुका है। सूत्रों के हवाले से पता चला हैं  कि इस भुगतान को निकालने के लिए ग्राम पंचायत सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर का सहारा लिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए, जनपद पंचायत में शिकायत दर्ज कराई है।

 *घोटाले का विवरण और वित्तीय संरचना :-*

यह पूरा मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 जब कुम्हेडिन और मुसरा आंगनबाड़ी केंद्रों की सुरक्षा और परिसीमन के लिए बाउंड्री वॉल के निर्माण को मंजूरी मिली थी। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य की स्वीकृत लागत लगभग 6,98,000 रुपए थी। ग्रामीण बताते हैं कि कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन बहुत धीमी गति से और जल्द ही बीच में छोड़ दिया गया। आज स्थिति यह है कि साइट पर निर्माण कार्य 40% से 50% ही पूरा हुआ दिखता है, जबकि भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।सरकारी नियमानुसार, किसी भी निर्माण कार्य का भुगतान 'कार्य मूल्यांकन प्रमाण पत्र' (Measurement Book-MB) के आधार पर होता है, जिसे इंजीनियर द्वारा प्रमाणित किया जाता है, और फिर ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और सरपंच के हस्ताक्षर के बाद अंतिम रूप से भुगतान होता है। इस मामले में, यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि अधूरा काम होने के बावजूद, इंजीनियर आशीष प्रजापति ने कथित तौर पर झूठा 'कार्य मूल्यांकन प्रमाण पत्र' जारी किया।

*इंजीनियर आशीष प्रजापति की भूमिका :-*
भ्रष्टाचार की इस कड़ी में उप-अभियंता (इंजीनियर) आशीष प्रजापति की भूमिका सबसे अधिक संदेह के घेरे में है। सरकारी निर्माण कार्यों में इंजीनियर की जिम्मेदारी होती है कि वह न केवल निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी करे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि 'मूल्यांकन बुक' (MB) में दर्ज मात्रा धरातल पर किए गए कार्य से मेल खाती हो।
आरोप है कि इंजीनियर प्रजापति ने कार्य की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए, अधूरे कार्य को 'पूर्ण' या 'लगभग पूर्ण' दर्शाया। 6,98,000 के भुगतान के लिए उनका सत्यापन निर्णायक था। यदि उनका प्रमाणन सही होता, तो भुगतान हो सकता था, लेकिन कार्यस्थल की वर्तमान स्थिति उनके प्रमाणीकरण की ईमानदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यह सीधे तौर पर 'लोक सेवक' के रूप में शक्तियों के दुरुपयोग और झूठे दस्तावेज़ तैयार करने के दायरे में आता है। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियर ने कार्यस्थल का निरीक्षण या तो किया ही नहीं, या जानबूझकर सचिव रामदमन सिंह के साथ मिलकर झूठी रिपोर्ट दी।
 
*फर्जी हस्ताक्षर और सचिव रामदमन सिंह का षड्यंत्र:-*
इस घोटाले का दूसरा मुख्य पहलू ग्राम पंचायत सचिव रामदमन सिंह से जुड़ा है। सचिव पर दोहरे अपराध का आरोप है: फर्जी बिल भुगतान: इंजीनियर से झूठा मूल्यांकन कराकर, उन्होंने भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। धोखाधड़ी  सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने भुगतान निकालने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच के जाली/फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग किया। ग्रामीणों का यह भी आरोप हैं कि सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग करना यह दर्शाता है कि सचिव ने सरपंच को विश्वास में लिए बिना, या उनकी अनुमति के बिना, सरकारी खाते से पैसे निकालने की आपराधिक साजिश रची। यह कृत्य 420 (धोखाधड़ी) और  (जालसाजी) जैसी गंभीर आपराधिक धाराओं के अंतर्गत आता है। 

स्थानीय प्रतिक्रिया और जनता का रोष 
ग्राम कुम्हेडिन और मोसर के निवासियों में इस भ्रष्टाचार को लेकर गहरा रोष है। ग्रामीण महिलाएँ, जिनके बच्चे इन आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ते हैं, इस बात से नाराज हैं कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य में भी घोटाला किया गया है। स्थानीय निवासी मोहन सिंह ने कहा, "यह हमारी आँखों के सामने हुआ है। इंजीनियर साहब और सचिव मिलकर आए और भुगतान कराकर चले गए। अब न पूरी बाउंड्री है और न गुणवत्ता। इस पैसे की वसूली इन्हीं लोगों से होनी चाहिए।"यह मामला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि निचले स्तर पर स्थानीय निकाय में चेक एंड बैलेंस (नियंत्रण और संतुलन) का अभाव है। सरपंच, सचिव, और इंजीनियर—ये तीन मुख्य स्तंभ होते हैं जो सार्वजनिक धन की सुरक्षा करते हैं। यहाँ तीनों में से दो की संलिप्तता दिखती है। 

*सीईओ और जिला कलेक्टर से की ग्रामीणों ने कार्यवाही की मांग :*

ग्रामीणों ने इंजीनियर आशीष प्रजापति और सचिव रामदमन सिंह और सरपंच के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो । और पूरे मामले की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) या किसी अन्य उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से समयबद्ध जांच कराई जाए। फर्जी हस्ताक्षर मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। जब तक इस 6.98 लाख के घोटाले की गहराई तक जाकर दोषियों को दंडित नहीं किया जाता, तब तक सरकारी योजनाओं पर जनता का विश्वास बहाल होना संभव नहीं है।

 *इनका कहना हैं कि* 

जब संबंध में जानकारी मांगी गई तो कहना था कि मेरे को भी ग्रामीणों ने शिकायत और कार्यवाही की मांग की हैं और जो भी ग्रामीणों ने आरोप लगाया हैं वो सत्य हैं जिसकी जाँच को लेकर मैं उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करूंगा और कार्यवाही होंगी। 
 *अर्जुन सोनी बीजेपी मंडल अध्यक्ष बुढ़ार* , 

इनका कहना हैं

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