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रोजगार के बदले अवैध वसूली, नियमविरुद्ध शपथ-पत्र और बाहरी लोगों की भर्ती का आरोप


आर.के. अर्थ रिसोर्सेस प्रा.लि. के खिलाफ स्थानीय युवाओं में उबाल, धरना-अनशन की चेतावनी
शहडोल रोहित वर्मा 

एसईसीएल के सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत संचालित खनन कार्यों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं की उपेक्षा, रोजगार के बदले अवैध वसूली, श्रम कानूनों के उल्लंघन और नियमविरुद्ध भर्ती को लेकर आर.के. अर्थ रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी विवादों में घिरती नजर आ रही है। जन नगर परिषद बकहो एवं बकही के स्थायी निवासियों ने महाप्रबंधक, एसईसीएल सोहागपुर एरिया को लिखित शिकायत सौंपते हुए कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
स्थानीय युवाओं के अनुसार पूर्व में सीबीएल एवं सिनसोल प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में कार्यरत रहे अनेक मजदूर वर्तमान में बेरोजगार हैं। इन कंपनियों का कार्य समाप्त होने के बाद अब आर.के. अर्थ रिसोर्सेस प्रा.लि. द्वारा उत्खनन कार्य संचालित किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी व्यक्तियों को मनमाने तरीके से भर्ती किया जा रहा है।
“बकहो-बकही को प्राथमिकता” सिर्फ कागजों में?
कंपनी में संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे अनिल सिंह नामक व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहा जाता है कि बकहो और बकही के निवासियों को ही रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन स्थानीय युवाओं का आरोप है कि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। युवाओं का कहना है कि कार्यालय पहुंचते ही उनसे पहला सवाल यही किया जाता है—

तुम किसके आदमी हो?”

जिससे यह स्पष्ट होता है कि रोजगार योग्यता या स्थानीयता के आधार पर नहीं, बल्कि प्रभावशाली व्यक्तियों और राजनीतिक संरक्षण के आधार पर दिया जा रहा है।
रोजगार के बदले अवैध वसूली के आरोप
स्थानीय युवाओं ने आरोप लगाया है कि रोजगार दिलाने के बदले अनिल सिंह एवं उनके कथित माध्यमों द्वारा धन की मांग की जा रही है। युवाओं ने इसे खुला भ्रष्टाचार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शपथ-पत्र के नाम पर श्रम कानूनों की धज्जियां
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनी द्वारा रोजगार से पूर्व 11 बिंदुओं का एक शपथ-पत्र भरवाया जा रहा है, जिसमें कई शर्तें सीधे-सीधे श्रम कानूनों के खिलाफ हैं।
शपथ-पत्र में यह शर्त शामिल है कि—
यदि कोई कर्मचारी दो वर्ष के भीतर कार्य छोड़ता है तो उसे कंपनी को ₹1,00,000/- देना होगा।
यदि नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी का चयन किसी शासकीय नौकरी में हो जाता है, तब भी उसे ₹1,00,000/- देने की बाध्यता होगी।
दुर्घटना या अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी मजदूर पर डाली जा रही है।
शिक्षित मजदूरों का कहना है कि बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के लिए यह शर्तें अमानवीय हैं। माइंस एक्ट 1952, कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड एबोलिशन) एक्ट 1970 सहित किसी भी श्रम कानून में इस तरह के शपथ-पत्र का कोई प्रावधान नहीं है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी पर भी सवाल
अनिल सिंह की उम्र लगभग 65 से 67 वर्ष बताई जा रही है और वे एसईसीएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। स्थानीय युवाओं ने सवाल उठाया है कि निजी आउटसोर्स कंपनी द्वारा उन्हें किस आधार पर लाभ दिए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या उन्हें ईपीएफ और इंश्योरेंस का लाभ दिया जा रहा है?
यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी—कंपनी की या अनिल सिंह की?
बीटीसी और मेडिकल के बिना मजदूरों की तैनाती!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आर.के. अर्थ रिसोर्सेस प्रा.लि. में कार्यरत कुछ कर्मचारी ऐसे हैं जिनका न तो बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) है और न ही मेडिकल परीक्षण कराया गया है, इसके बावजूद उन्हें संचालित माइंस में उतार दिया गया है।
इसी लापरवाही का परिणाम बताया जा रहा है कि 6 फरवरी को एक कर्मचारी को कार्य के दौरान हृदयाघात हुआ, जिसे स्थानीय अस्पताल से बिलासपुर रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि उक्त कर्मचारी का न तो मेडिकल कराया गया था और न ही बीटीसी मौजूद था।
सूत्र यह भी बताते हैं कि उक्त कर्मचारी को रिश्तेदारी और सिफारिश के आधार पर कार्य पर रखा गया था। सवाल यह है कि बिना प्रशिक्षण और मेडिकल के खतरनाक खनन क्षेत्र में मजदूर को किस नियम के तहत उतारा गया?
स्थानीय नियोजन नीति की खुली अवहेलना
स्थानीय निवासियों ने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड, एसईसीएल एवं राज्य शासन की स्थानीय नियोजन नीति के अनुसार खनन परियोजनाओं में प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। इसके बावजूद नीति की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि वे वर्षों से धूल, प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याओं और पर्यावरणीय नुकसान झेल रहे हैं, लेकिन जब रोजगार की बात आती है तो उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाता है।
धरना-अनशन की चेतावनी
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि—
अनिल सिंह की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अवैध वसूली और नियमविरुद्ध शपथ-पत्र पर कठोर कार्रवाई हो।
कंपनी को स्थानीय नियोजन नीति के तहत तत्काल स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के निर्देश दिए जाएं।
युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे समस्त बेरोजगार युवाओं के साथ शारदा ओसीएम कॉलरी के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन एवं अनशन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी कॉलरी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।
स्थानीय युवाओं का स्पष्ट कहना है—
“हम आंदोलन नहीं चाहते, हम केवल अपना संवैधानिक और नैतिक अधिकार—रोजगार—चाहते हैं।”

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