बुढ़ार में आध्यात्मिक चेतना का महासंगम
“भावनाओं को साधो, जीवन स्वयं प्रकाश बन जाएगा” – मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज
दिनेश चौधरी बुढ़ार
धनपुरी। नगर में चल रहे भव्य पंचकल्याणक महोत्सव के बीच विद्यासागर स्कूल में आयोजित पत्रकार वार्ता उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठी, जब प्रखर जैन संत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने जीवन के गूढ़ सत्य को अत्यंत सरल शब्दों में प्रस्तुत किया।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा—
“जीवन केवल शरीर और बुद्धि से संचालित नहीं होता, हमारे अस्तित्व की सबसे गहरी और सबसे शक्तिशाली धारा भावना है। भावनाएं ही जीवन की दिशा और दशा तय करती हैं। यदि ये विकृत हो जाएं तो जीवन अंधकार में चला जाता है, और यदि निर्मल हो जाएं तो वही जीवन आलोकित हो उठता है।”
तकनीकी युग में आंतरिक रिक्तता
मुनि श्री ने वर्तमान समय की विडंबना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज मनुष्य साधनों में समृद्ध है, पर संतोष में निर्धन होता जा रहा है। आधुनिक तकनीक, संसाधन और सुविधाएं होने के बावजूद व्यक्ति तनाव, अकेलेपन और मानसिक अशांति से ग्रस्त है।
उन्होंने स्पष्ट कहा—“हमने बाहरी साधनों को तो साथ ले लिया, पर अपनी भावनाओं को साधने की कला खो दी।”
पंचकल्याणक: केवल अनुष्ठान नहीं, आत्मजागरण का अभियान
मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव मात्र धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का महापर्व है। इसका मूल उद्देश्य व्यक्ति के अंतर्मन को परिष्कृत करना और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है।
उन्होंने कहा कि भावना एक अदृश्य शक्ति है, जो हमारे विचार, निर्णय और आचरण को दिशा देती है। जब भावना पवित्र होती है, तब जीवन स्वयं एक प्रेरणा बन जाता है।
पत्रकारों से आत्मीय संवाद, पुस्तक भेंट की और अपनी आशीर्वाद दिए
पत्रकारों के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए मुनि श्री ने जीवन के व्यावहारिक पक्षों पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने अपनी प्रेरक कृति “जीवन जीवन की एबीसीडी” पत्रकारों को भेंट की, जिसमें जीवन के मूल सूत्रों को सरल, सारगर्भित और व्यवहारिक शैली में प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि—कैलाश लालवानी, अजय नामदेव, राजू अग्रवाल, मुरलीधर त्रिपाठी, मोहन नामदेव, , गंगाधर चौधरी, दिनेश चौधरी, शिवम कुशवाहा ब्रिजेश शर्मा विजय तिवारी जीवन यादव आशीष नामदेव सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।
बुढ़ार की पावन धरती पर चल रहा यह पंचकल्याणक महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन रहा है, बल्कि समाज को आत्मचिंतन, संयम और भावनात्मक शुद्धता का सशक्त संदेश भी दे रहा है।
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