एपस्टीन फाइल पर एडवोकेट ज्ञानेंद्र मिश्रा का साहसिक और मानवीय पक्ष, गरीब-बेसहारा की आवाज़ बनकर फिर आए सामने
साहिल खान / शहडोल
बहुचर्चित और संवेदनशील एपस्टीन फाइल को लेकर एडवोकेट ज्ञानेंद्र मिश्रा ने जिस संतुलन, संवेदनशीलता और नैतिक साहस के साथ अपना पक्ष रखा है, उसने एक बार फिर उन्हें समाज के सजग, जिम्मेदार और निर्भीक प्रहरी के रूप में स्थापित कर दिया है। उन्होंने इस हृदयविदारक और नृशंस प्रकरण की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यदि इसमें कोई भी भारतीय नागरिक, राजनीतिक व्यक्ति या उद्योगपति संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना ठोस जांच के किसी पर आरोप लगाना गलत है, लेकिन दोषियों को चिन्हित कर उन्हें कठोर सजा देना एक स्वस्थ और सभ्य समाज की बुनियाद है।
एडवोकेट ज्ञानेंद्र मिश्रा केवल एक कुशल और अनुभवी अधिवक्ता ही नहीं, बल्कि वे वर्षों से गरीब, बेसहारा और पीड़ितों की मजबूत आवाज़ बनकर सामने आते रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि वे जरूरतमंद और असहाय लोगों से किसी भी प्रकार की फीस नहीं लेते और न्याय की लड़ाई को पूरी निष्ठा और सेवा भाव से लड़ते हैं। अनेक ऐसे परिवार हैं, जिन्हें उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के कानूनी सहारा देकर टूटती उम्मीदों को फिर से जीवित किया है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि गरीब और बेसहारा लोगों को न्याय दिलाने के लिए उनके घर का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता है। पीड़ित चाहे किसी भी समय, किसी भी परिस्थिति में पहुंचे — एडवोकेट ज्ञानेंद्र मिश्रा उन्हें निराश नहीं लौटाते। उनका व्यवहार, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण यह साबित करता है कि वे कानून को केवल दलीलों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे इंसानियत से जोड़कर देखते हैं।
उनका यह बेबाक बयान और निस्वार्थ सेवा भावना यह दर्शाती है कि कानून उनके लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सुधार और मानवता की रक्षा का सशक्त माध्यम है। आज के समय में ऐसे ही अधिवक्ताओं की आवश्यकता है, जो सच, न्याय और पीड़ितों के पक्ष में निर्भीक होकर खड़े हों। एडवोकेट ज्ञानेंद्र मिश्रा की निष्पक्षता, संवेदनशीलता, साहस और सेवा भावना की चारों ओर प्रशंसा हो रही है और वे समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
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