*वन विभाग और पुलिस विभाग की संलिप्त भूमिका*
*उमरिया अरुण विश्वकर्मा
जिले में अवैध रेत का उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार धमोखर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत रायपुर बीट से इस वक्त एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है। जहाँ एक ओर जंगल में बाघों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी टाइगर मूवमेंट वाले इलाके में खुलेआम अवैध रेत का उत्खनन और ढुलाई का काम किया जा रहा है। इनकी ट्रेक्टर पर पहले भी कार्यवाही हो चुकी है। लेकिन सवाल ये है कि क्या वन्यजीवों की जान से बड़ा माफिया हो गया है।
तस्वीरें धमोखर रेंज की रायपुर बीट अंतर्गत धनहरा नाला की हैं। यह वही इलाका है जहाँ टाइगर की नियमित आवाजाही दर्ज की जाती रही है। इसके बावजूद इस नाले से धड़ल्ले से अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक धनहरा नाला से दिन-रात रेत का अवैध उत्खनन और ढुलाई जारी है।
ट्रैक्टरों और अन्य साधनों से दिनभर रेत निकाली जा रही है, लेकिन न तो वन विभाग की कोई कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही खनिज विभाग की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध रेत का कारोबार लंबे समय से चल रहा है। यह सब जानते हैं कि यह इलाका टाइगर मूवमेंट जोन है, इसके बावजूद भारी मशीनों और वाहनों की आवाजाही से न सिर्फ जंगल को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी खतरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन को इस अवैध रेत उत्खनन की जानकारी नहीं है? या फिर सब कुछ जानते हुए भी प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है, और अगर इसी तरह जंगलों में खनन चलता रहा, तो टाइगर संरक्षण के दावे आखिर किसके लिए हैं?
अब देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद वन विभाग और जिला प्रशासन क्या कार्यवाही करता हैं, और धनहरा नाला में चल रहे इस अवैध रेत कारोबार पर कब तक लगाम लगाई जाती है।
*इनका कहना हैं,*
जब इस संबंध में बात करना चाहा तो फोन उठाना उचित नहीं समझा
*रेंजर सचिन सिंह रेंच धमोखर*
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