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थ्री, टू, वन…जीरो: 60 लाख टन पार, सोहागपुर एरिया ने रचा इतिहास — कोल इंडिया में बजा डंका

8 खदानों की संयुक्त ताकत से लक्ष्य हासिल,बंगवार यूजी माइंस का राष्ट्रीय रिकॉर्ड,रामपुर बटुरा ने दिया बढ़ा योगदान
शहडोल कोयलांचल
 
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) का सोहागपुर क्षेत्र वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य पार कर एक नई पहचान के साथ उभरा है। काउंटडाउन “थ्री, टू, वन… जीरो” के साथ जैसे ही अंतिम आंकड़ा पूरा हुआ, पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल बन गया। यह उपलब्धि न केवल सोहागपुर बल्कि पूरे कोल इंडिया के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
इस सफलता के पीछे चार ओपन कास्ट और चार भूमिगत खदानों की संयुक्त रणनीति, बेहतर समन्वय और हजारों श्रमिकों की अथक मेहनत रही। वर्षभर चले उत्पादन अभियान का चरम मार्च माह में देखने को मिला, जब हर खदान ‘मिशन मोड’ में नजर आई।
लक्ष्य से उपलब्धि तक: ऐसे तय हुआ सफर
एसईसीएल मुख्यालय द्वारा सोहागपुर एरिया को 60 लाख टन का वार्षिक लक्ष्य सौंपा गया था। यह लक्ष्य आसान नहीं था, क्योंकि अलग-अलग खदानों की उत्पादन क्षमता और संसाधनों में भिन्नता थी। 4 ओपन कास्ट खदानें,4 भूमिगत खदानें, कुल 8 इकाइयों का संयुक्त प्रयास
साल की शुरुआत से ही उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया, लेकिन असली परीक्षा मार्च माह में हुई, जब हर दिन का उत्पादन लक्ष्य निर्णायक बन गया।
बंगवार यूजी माइंस: रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड
सोहागपुर एरिया की बंगवार भूमिगत खदान इस पूरे अभियान की ‘गेम चेंजर’ साबित हुई। यहां एकल कंटीन्यूअस माइनर (CM) मशीन ने उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया।

एक दिन में 5,300 टन उत्पादन — कोल इंडिया स्तर पर रिकॉर्ड
एक माह में 1.20 लाख टन उत्पादन — नया कीर्तिमान

यह उपलब्धि दर्शाती है कि भूमिगत खदानों में आधुनिक तकनीक के उपयोग से उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि संभव है।

उपक्षेत्रीय प्रबंधक संजय सिंह और खान प्रबंधक डी.आर. कुर्रे ने खदान पहुंचकर श्रमिकों का उत्साहवर्धन किया और सोहागपुर एरिया के महाप्रबंधक बी के जेना ने बंगवार पहुंच कर धन्यवाद देते हुए इसे टीम वर्क की जीत बताया।
रामपुर बटुरा: मेगा प्रोजेक्ट बना बैकबोन
सोहागपुर एरिया की सबसे बड़ी ओपन कास्ट खदान रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट ने 28 मार्च को ही 20 लाख टन उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया था।

यह अकेले एरिया के कुल लक्ष्य का लगभग आधा योगदान रहा, जिसने पूरे अभियान को मजबूत आधार दिया।
अन्य खदानों का भी दमदार योगदान, खैरहा यूजी माइंस ने लक्ष्य समय से पहले पूरा किया,अन्य खदानों ने अंतिम सप्ताह में तेज उत्पादन कर लक्ष्य को पार कराया।
कई यूनिट्स ने लगातार अतिरिक्त शिफ्टों में काम किया
यह समन्वय ही सोहागपुर की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना।

मार्च: ‘डू ऑर डाई’ का महीना

कोयला उद्योग में मार्च को ‘टारगेट माह’ कहा जाता है, और इस बार यह पूरी तरह सही साबित हुआ।

🔸 24×7 मॉनिटरिंग
🔸 लगातार ओवरटाइम और अतिरिक्त शिफ्टें
🔸 मशीनों का अधिकतम उपयोग
🔸 अधिकारियों की सतत उपस्थिति। 

हर स्तर पर लक्ष्य को लेकर दबाव था, लेकिन इसे सकारात्मक ऊर्जा में बदलते हुए टीम ने सफलता हासिल की।

श्रमिकों की मेहनत: असली हीरो

इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय उन श्रमिकों को जाता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और समय के दबाव के बावजूद लगातार काम किया।

खदानों में कार्यरत इंजीनियरों, ऑपरेटरों और प्रबंधन टीम के समन्वय ने यह साबित किया कि सामूहिक प्रयास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
भविष्य की दिशा: और बड़े लक्ष्य की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, इस शानदार प्रदर्शन के बाद सोहागपुर एरिया को अगले वित्तीय वर्ष में और बड़ा लक्ष्य मिलने की संभावना है।

संभावित योजनाएं:
🔹 नई कंटीन्यूअस माइनर मशीनों की तैनाती
🔹 भूमिगत उत्पादन क्षमता में वृद्धि
🔹 ओपन कास्ट माइंस में तेजी से ओवरबर्डन हटाना
🔹 प्राइवेट एजेंसियों के सहयोग से उत्पादन बढ़ाना

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सोहागपुर एरिया जल्द ही 70-80 लाख टन या उससे अधिक उत्पादन के स्तर को छू सकता है।

 जश्न और गौरव का माहौल

लक्ष्य पूरा होते ही पूरे सोहागपुर एरिया में उत्सव जैसा माहौल बन गया। सोहागपुर एरिया के महाप्रबंधक बीके जेना श्रमिकों और अधिकारियों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इस सफलता को ऐतिहासिक बताया।

असली मेहनत

सोहागपुर एरिया की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि मेहनत, तकनीक, रणनीति और टीम वर्क का जीवंत उदाहरण है। इसने साबित कर दिया कि सही नेतृत्व और समर्पण से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है — और अब नजरें अगले बड़े टारगेट पर टिकी हैं।

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